Wednesday, May 6, 2026

ईश्वरीय प्रेम ( सूफी ग़ज़ल)

 ईश्वरीय प्रेम ( सूफी ग़ज़ल)



सब कहते हैं दुनिया क्या बोलेगी, अब इसकी परवाह नहीं है
हमने तो बस उस रब को चुना, अब कोई और राह नहीं है

लोगों की बातों में उलझना, अब हमें कुछ भी अच्छा नहीं है
खुदा की मोहब्बत के सिवा, यहाँ कोई भी सच्चा नहीं है

वो जो दिल के अंदर बैठा है, वही मेरा असली मीत नहीं है
दुनिया की इस भीड़-भाड़ में, मेरी कोई और जीत नहीं है

मैं तो एक छोटा सा जरिया हूँ, मुझे गर्व का कोई अहसास नहीं है
दुनिया की इन महफ़िलों में, मुझे कोई भी प्यास नहीं है

लोगों ने तो पत्थर ही मारे, पर मुझे कोई गिला नहीं है
जबसे उसकी नज़र मिली, अब कोई भी सिलसिला नहीं है

दुनिया वाले क्या समझेंगे, जो मेरे दिल का साज़ नहीं है
हम तो उसके एहसास में हँसते, हमें किसी पर नाराज़ नहीं है

जहाँ भी देखा, वही दिखा, बस उसका ही नूर समाया नहीं है
अब तो कोई शिकायत बची, अब कोई भी फितूर नहीं है

जी आर ने तो लिख दी अपनी कहानी, अब कोई और काम नहीं है
दुनिया चाहे रूठे या माने, मुझे किसी का भी नाम नहीं है

जी आर कवियुर 
05 04 2026
(कवियुर , तिरुवल्ला)

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