Wednesday, May 27, 2026

बंद खिड़की

बंद खिड़की

बारिश से ढकी उस खिड़की के पास,  
खामोशी ठहरी हुई थी।  
बाहर की धुंधली दुनिया,  
किसी याद जैसी लग रही थी।  

हवा की भीगी छुअन में,  
पुराने दिन फिर जाग उठे।  
अनकहे रह गए एहसास,  
मन में लहर बनते रहे।  

जब खिड़की खुली अचानक,  
रोशनी भीतर उतर आई।  
बंद पड़े उस हृदय में,  
आशा फिर से खिल उठी।
 
जी आर कवियुर 
28 05 2026
(कवियूर, तिरुवल्ला)

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