Thursday, May 21, 2026

रेत पर लिखे शब्द

रेत पर लिखे शब्द

लहरों से छुए उस तट पर,  
रेत में कुछ शब्द उभर आए।  
हवा की शांत यात्रा में,  
वे धीरे-धीरे मिटते गए।  

सांझ की धुंधली रोशनी में,  
यादें फिर लौटकर आईं।  
अनकही छिपी भावनाएँ,  
मन में बहती ही रहीं।  

समय से धुली उन राहों पर,  
केवल पदचिह्न शेष रहे।  
रेत पर लिखे वे शब्द,  
खामोशी में फिर जाग उठे।

जी आर कवियुर 
21 05 2026
(कवियूर , तिरुवल्ला)

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