Friday, May 1, 2026

ख़ामोशी की ताक़त (ग़ज़ल)

 ख़ामोशी की ताक़त (ग़ज़ल)

ख़ामोशी में भी कितने असर करते हैं
अंदाज़-ए-बयाँ दिल पे सफ़र करते हैं

हल्की सी लहर दिल को छू जाया करती है
कुछ एहसास यूँ जीना बेहतर करते हैं

अनदेखी सी दुनिया मन में बसती रहती
भीतर के रंग जीवन सुंदर करते हैं

पलकों पे ठहर जाएँ जो भीगी सी यादें
चुपचाप ही आँखों को दरिया करते हैं

चलते हुए साये भी सिखला जाते हमको
रास्ते ख़ुद ही नया मुक़द्दर करते हैं

बिन बोले भी दिल अपनी बात कह जाता
सन्नाटे भी कितनी बातें मुखर करते हैं

रुकना न कभी, ये वक़्त इशारा देता
लम्हे ही तो जीवन को बेहतर करते हैं

जी आर मैं अपने जज़्बात यूँ कहता हूँ
मैं ख़ुद से ही हर दिन बातें करता हूँ

जी आर कवियुर 
27 04 2026
(कवियुर, तिरुवल्ला)

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