Tuesday, May 26, 2026

लंबी होती परछाइयों का पथ

लंबी होती परछाइयों का पथ

सांझ की धुंधली रोशनी में,  
परछाइयाँ लंबी होने लगीं।  
सूनी पड़ी उस राह किनारे,  
खामोशी ठहर सी गई।  

हवा की कोमल हलचल में,  
यादें बहती चली आईं।  
अनकहे रह गए शब्द,  
दिल में ठहरे रहे।  

दूर कहीं धुंधली सी रोशनी,  
भोर का संकेत बन गई।  
इन लंबी होती परछाइयों के पथ पर,  
आशा साथ चलती रही।

जी आर कवियुर 
26 05 2026
(कवियूर , तिरुवल्ला)

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