नन्हा तपस्वी
कोमल पत्तों की नोक पर बैठा,
सूक्ष्म रूप में ध्यान लगाए।
शांत खड़ा तू साये जैसा,
हरी डाल की गोद में मुस्काए।
महीन पंखों की हीरा जैसी आभा,
धूप की किरणों में चमक रही।
ना रक्त की चाह, ना कोई शोर,
फूलों के रस में उमंग बही।
सोती हुई इस दुनिया का तू प्रहरी,
रचयिता की एक अनोखी रचना।
छोटा सा जीवन, पर गरिमा भारी,
सादगी की तू सुंदर प्रेरणा।
जी आर कवियुर
14 05 2026
(कवियूर , तिरुवल्ला)

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