धूप का स्पर्श
जब धूप हल्के से छू जाती,
एक कोमल गर्मी भर जाती।
सुबह की किरणें राहों पर गिरें,
प्रकृति नई सी खिल उठती।
पत्तों पर चमकती रोशनी में,
जीवन जागता धीरे-धीरे।
सुनहरी आभा धरती पर फैले,
आंखों में उजाला भर दे।
जब ठंडी हवा साथ मिल जाए,
मन में सुकून भर जाता।
इस कोमल धूप के स्पर्श में,
हृदय आनंद पा जाता।
जी आर कवियुर
24 04 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)
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