ख़ामोशी की बारिश (ग़ज़ल)
तेरी यादों की बारिश में मैं भीगता रहूँगा
ग़ज़ल बनकर तेरे लफ़्ज़ों में ही जीता रहूँगा
तेरी आँखों की चमक में यूँ ही खोता रहूँ
तेरे ख़्वाबों के जहाँ में ही बसता रहूँगा
तेरी साँसों की महक मुझको छूती रहे हर पल
तेरे दिल की हर धड़कन में धड़कता रहूँगा
तेरी राहों की धूल मुझको उड़ाती रहे यूँ ही
तेरे क़दमों के निशाँ संग ही चलता रहूँगा
तेरी चाहत की लहर मुझको बहाती रहे हर दम
तेरे एहसास के दरिया में ही रहता रहूँगा
तेरी यादों के उजाले मुझे जलाते रहें हर पल
तेरी तन्हाइयों में भी मैं हँसता रहूँगा
तेरे नाम की गूंज दिल में रहती रहे हर दम
तेरी खामोश दुआओं में ही बसता रहूँगा
‘जी आर’ मैं अपनी मोहब्बत की कहानी लिखता हूँ
ग़ज़ल बनकर तेरे दिल में ही जीता रहूँगा
जी आर कवियुर
25 04 2026
( कवियुर,तिरुवल्ला )
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