Saturday, May 2, 2026

जीना है तो ज़िंदगी से

 जीना है तो ज़िंदगी से  

जीना है तो ज़िंदगी से  
मरते दम तक जीतने को  
मल्लयुद्ध करना होगा  

आसमान से नहीं गिरते  
चावल, जीरा, जीवन के दाने  

जब वसंत आकर छू जाए  
नमन करो उस पावन ज्योति को  
जो हर दिशा में जलती है  

मेहनत के बिना नहीं मिलती  
कविता की एक पंक्ति भी  

पसीने की हर एक बूँद से  
सफलता के बीज उगते हैं  
थके हुए इन कदमों को भी  
सपने ही आगे बढ़ाते हैं  

अँधेरी रातों के बीच भी  
रोशनी को ढूँढते चलो  
टूटे बिना जो खड़ा रहे  
ज़िंदगी उसी के साथ चले  

हार भी राह दिखाती है  
ऊँचाइयों तक ले जाने को  
विश्वास अगर थामे रखो  
जीत तुम्हारी परछाई होगी 

 जी आर कवियुर 
28 04 2026
(कवियुर , तिरुवल्ला)

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