जीना है तो ज़िंदगी से
जीना है तो ज़िंदगी से
मरते दम तक जीतने को
मल्लयुद्ध करना होगा
आसमान से नहीं गिरते
चावल, जीरा, जीवन के दाने
जब वसंत आकर छू जाए
नमन करो उस पावन ज्योति को
जो हर दिशा में जलती है
मेहनत के बिना नहीं मिलती
कविता की एक पंक्ति भी
पसीने की हर एक बूँद से
सफलता के बीज उगते हैं
थके हुए इन कदमों को भी
सपने ही आगे बढ़ाते हैं
अँधेरी रातों के बीच भी
रोशनी को ढूँढते चलो
टूटे बिना जो खड़ा रहे
ज़िंदगी उसी के साथ चले
हार भी राह दिखाती है
ऊँचाइयों तक ले जाने को
विश्वास अगर थामे रखो
जीत तुम्हारी परछाई होगी
जी आर कवियुर
28 04 2026
(कवियुर , तिरुवल्ला)
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