Wednesday, February 18, 2026

यादों के आसमाँ में

 यादों के आसमाँ में


इस क़दर टूट चुके हैं हम तेरी याद में,

तेरी वफ़ा माँगते हैं हम भी तेरे सहारे में।


दिल को सुकूँ मिलता नहीं इस बेकरार रात में,

खोए से फिरते हैं हम तेरे ही ख़्वाब में।


तन्हाई के बादल छा गए दिल के आसमाँ में,

भीगते रहते हैं अरमाँ तेरे इंतज़ार में।


हर धड़कन पुकारे तेरा नाम ख़ामोशी में,

डूबते जाते हैं लम्हे तेरे एहसास में।


दुनिया ने भुला दिया हमें अपने हिसाब में,

हम आज भी ज़िंदा हैं तेरे ही ख़याल में।


रात भर जागते रहे तेरी ही चाहत में,

चाँद भी डूबता रहा मेरी निगाह में।


टूट कर चाहा तुझे हमने हर हाल में,

खुद को ही खो दिया तेरे ऐतबार में।


आँखों से गिर पड़े जो अश्क़ ख़ामोशी में,

डूबते रहे वो भी तेरे ही ख़याल में।


ज़ख़्म दिल के भर सके ना उम्र भर में,

बस दर्द ही मिलता रहा हर इम्तिहान में।


छोड़ कर भी तू गया तो क्या गया मुझसे,

साँसें अटकी रह गई तेरे ही नाम में।


तन्हाई के बादल छा गए दिल के आसमाँ में,

‘जी.आर.’ अब भी जी रहा है तेरी यादों में।



जी आर कवियुर 

16 02 2026

(कनाडा, टोरंटो)

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