Monday, February 2, 2026

नदी की उंगलियाँ


नदी की उंगलियाँ

धरती की छाती पर लंबी उंगलियाँ,
पानी द्वारा बनाई गई राहें।
रेतीले किनारों पर उकेरी गति,
निशब्दता को जगा देती है।

लहरें आपस में बात करती हैं,
बिना आवाज़ की भाषा में।
धूप से गरम पत्थरों के बीच,
ठंडक अपना रास्ता ढूँढ लेती है।

नीचे मुड़ती पगडंडियाँ,
दूरी जाने बिना फैलती जाती हैं।
नदी अपनी उंगलियाँ बढ़ाकर,
धरती को कोमलता से छूती है।

जी आर कवियुर 
30 01 2026 
( कनाडा, टोरंटो)

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