“चाँद सितारे तेरे कदमों में” ( ग़ज़ल)
चाँद सितारे तोड़कर तेरे कदमों में रख दूँगा
गर तू कह दे एक बार, मैं दुनिया भी छोड़ दूँगा
तेरी आँखों की चमक में ही मेरा उजाला है
तेरे बिन इस दिल को मैं किससे जोड़ लूँगा
रात तन्हा भी अगर हो, तेरी यादें साथ हों
उन अँधेरों को भी हँसकर मैं मोड़ लूँगा
तेरे होंठों की हँसी है मेरी हर धड़कन में
तेरे ग़म को भी मैं अपने दिल पे ओढ़ लूँगा
चाँद भी शर्मा गया तेरी सूरत की रोशनी से
उसकी महफ़िल से भी तुझको मैं तोड़ लूँगा
अगर तू साथ हो तो हर सफ़र आसान लगे
तेरे बिन हर खुशी से भी मैं मुँह मोड़ लूँगा
'जी आर' दिल से जो निकली है ये आवाज़ आज
तेरे लिए चाँद भी बाँहों में मैं जोड़ लूँगा
जी आर कवियुर
14 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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