हृदय के अक्षरों में खोया हुआ"
तुम मौन रहो तो हृदय खिल उठे हैं गुलों सा,
तुम मौन रहो तो हृदय सज उठे हैं गुलों सा.(X2)
साया भी शाम की गलियों में आता है,
प्रेम की आभा मेरे हृदय में बहती है गुलों सा.(X2)
हवा भी नाम लिए बिना बहती है,
सितारे राहों में आँसुओं की चमक बिखेरते हैं गुलों सा.(X2)
चाँदनी रात में खामोशी गाती है,
हर धड़कन में तेरी याद बसती है गुलों सा.(X2)
फूलों की खुशबू भी तुझसे कहती है,
हर सांस में तेरा नाम लहराता है गुलों सा.(X2)
इस मौननंबर में मैं खो गया तेरे नाम से
यादों में जी आर कविता बनाकर जी रहा है ,गुलों सा.(X2)
जी आर कवियुर
04 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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