उनकी याद में (ग़ज़ल)
आ जाओ फिर से, बीत सी उमर गई,
कितने सावन आए, कितनी तन्हाई गुज़र गई।
दिल की बातें छुपा कर बैठा मैं वहीं,
तुम्हारी यादों में सारी उम्र गुज़र गई।
वो पल कभी लौटेंगे, बस ख्वाबों में ही सही,
तुम्हारी हँसी की खुशबू हर राह में गुज़र गई।
छू ना सके हमको ये दूरी की दीवारें,
मेरे अरमान तेरे बिना अधूरी गुज़र गई।
रिश्तों की उलझनें, अनकही मोहब्बतें,
हर उम्मीद बस तेरे इंतज़ार में गुज़र गई।
जी आर कहते हैं कि तन्हाई, उनकी याद में बीती,
सारी जिंदगी बस उनकी ख्याल में गुज़र गई।
जी आर कवियुर
10 02 2026
( कनाडा , टोरंटो)

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