Monday, February 9, 2026

चमपक की रोशनी

 चमपक की रोशनी

कोमल कुसुम धूप में चमकते हैं,  
हल्की सुगंध धीरे-धीरे हवा में फैलती है।  
झूलते पत्तों में रोशनी नाचती है,  
प्रकृति की शांतिमा निश्चब्द में गाती है।

फूलों की कोमलता में आँखें कहानी कहती हैं,  
क्षण संध्या की भव्यता स्वीकारते हैं।  
हरे वृक्षों की ठंडी छाया में नरमी से बैठना,  
प्रेम की चमक वातावरण को नृत्य करने देती है।

चांदी-सुनहरी रोशनी मुस्कुराती है,  
प्रकृति का गीत निश्चब्द बहता है।  
जीवन के रहस्य मौन में झिलमिलाते हैं,  
चमपक की रोशनी हृदय को प्रकाशित करती है।

जी आर कवियुर 
09 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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