Tuesday, February 17, 2026

चाँद सितारों के पार

 चाँद सितारों के पार



चाहे जितनी आँख मिचौली खेलो ऐ यार, आ गया हूँ  
तुझे ढूँढते ढूँढते चाँद सितारों के पार आ गया हूँ  

तू बादलों में छिपा रहा हर बार  
तेरी चाह में धरती से आकाश के पार आ गया हूँ  

तू समझा कोई पहुँच न पाए उस द्वार  
हर बंद रास्ते तोड़कर तेरे द्वार आ गया हूँ  

तेरी हँसी की खुशबू रही मेरे साथ हर बार  
उसी महक के सहारे तेरे घर के पार आ गया हूँ  

तेरी आँखों में बसा है मेरा सारा संसार  
उन्हीं नजरों की चमक में खुद को वार आ गया हूँ  

तेरे बिना सूना था जीवन का हर त्योहार  
तेरी एक मुस्कान से फिर बहार आ गया हूँ  

अब कहाँ छिपेगा मुझसे ऐ प्यार  
तेरी एक पुकार पर हर दीवार के पार आ गया हूँ  

जी आर भटका बहुत इस जग के संसार  
तेरी सच्ची मोहब्बत से खुद के पार आ गया हूँ

जी आर कवियुर 
16 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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