Monday, February 2, 2026

याद तेरी सताती है” (ग़ज़ल)

 याद तेरी सताती है” (ग़ज़ल)




टूटे हुए आईने को देखता तो याद तेरी सताती है  
हर टूटते हुए टुकड़े में बस तेरी बात ही आती है  

सन्नाटों में तेरा नाम बुलाता तो याद तेरी सताती है  
राहों में खोए हुए कदम फिर तेरी राह पाती है  

चांदनी रात में तन्हा बैठता तो याद तेरी सताती है  
हर चमकती हुई किरण में बस तू ही दिखाई देती है  

दिल के दरारों में उम्मीदें भी तन्हा रह जाती हैं  
हर दर्द के साथ तेरी याद फिर सताती है  

हवा के झोंकों में तेरी खुशबू महसूस करता हूँ  
तेरी सांस की गूंज जब आती है, याद तेरी सताती है  

बीती हुई बातों में खो जाता तो याद तेरी सताती है  
हर हँसी, हर जुदाई, अब बस तेरी राह दिखाती है  

सफर में हर मोड़ पर तेरा अक्स नजर आता है  
हर थमी हुई धड़कन में याद तेरी सताती है  

तन्हाई के मौसम में तेरी यादों का मौसम है  
हर सूनी गली में तेरी हँसी फिर सताती है  

आँखों के आँसुओं में भी तेरी छवि बसी रहती है  
हर गिरते पल में तेरी याद फिर सताती है  

ख्वाबों की दुनिया में भी तेरी ही छवि दिखती है  
हर नींद टूटते ही याद तेरी सताती है  

रात की तन्हाई में तेरी बातें फिर गुनगुनाता हूँ  
हर सन्नाटा सुनहरा याद तेरी सताती है  

अब अपने ही नाम को पुकारता हूँ तन्हा  
जी आर को हर पल तेरी याद फिर सताती है

जी आर कवियुर 
02 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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