नज़रों के सामने (ग़ज़ल)
आज भी और अभी भी नज़रों के सामने दिखाई देती हो,
दुनिया रात-दिन एक सी है, हर जगह दिखाई देती हो।
दिल की हर धड़कन में बस तुम्हारा नाम रहता है,
मेरी हर साँस में तुम दिखाई देती हो।
रातों की तन्हाई में जब याद तुम्हारी आती है,
बंद आँखों में तुम दिखाई देती हो।
इस भीड़ भरी दुनिया में कोई अपना सा नहीं लगता,
मेरे हर एहसास में तुम दिखाई देती हो।
मेरी हर दुआ में बस तुम्हारी ही बात होती है,
मेरे हर ख्वाब में तुम दिखाई देती हो।
'जी आर' के दिल की सच्ची सी ये कहानी है,
मेरे हर शेर में तुम दिखाई देती हो।
जी आर कवियुर
12 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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