Tuesday, February 17, 2026

रहमत की क़ीमत (ग़ज़ल)

रहमत की क़ीमत (ग़ज़ल)




साँसों की क़ीमत पर तुझको पाया,
ख़ुशबू की क़ीमत पर तुझको पाया है।

क़िस्मत की हर क़ीमत पर तुझको पाया,
रहमत की हर क़ीमत पर तुझको पाया है।

चाँदों की हर सूरत पर तुझको पाया,
फूलों की हर रंगत पर तुझको पाया है।

भीगी हुई पलकों की ख़ामोशी में,
आँसू की क़ीमत पर तुझको पाया है।

हँसती हुई सुबह की हर किरण में,
रोशनी की क़ीमत पर तुझको पाया है।

रंगों की हर छटा में तेरा नाम पाया,
ज़िंदगी की क़ीमत पर तुझको पाया है।

जौहरी ही जानता है क़ीमत मोती की,
शायर ही जानता है ग़ज़ल की क़ीमत पर तुझको पाया है।

कहता है ‘जी आर’ ये दुनिया से,
रहमत की क़ीमत पर तुझको पाया है।

जी आर कवियुर 
15 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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