कनाडा में भूकंप — कवि की चेतावनी
ठंड की चादर में
जो थक कर सो रहे थे, उन्होंने नहीं जाना,
सर्व सहय एक पल के लिए कांपी,
भूतकाल से आया चेतावनी का संदेश।
सर्व सहय को उखाड़कर विकृत किया उसने,
घंटाघर आकाश को छूते हुए हिले,
नीचे ज़मीन धीरे-धीरे बोली,
"सहनशीलता की सीमा है"
कवि अपनी आँखें खोलकर देखता है सर्व सहय को,
वह उन छिपे संदेशों को पहचानता है।
वचन लिखे, हलचल बनाई,
कल मनुष्यों के लिए चेतावनी छोड़ दी।
सहनशीलता और सतर्कता का पाठ उसने पढ़ाया,
प्रकृति की गंभीरता समझने का रास्ता दिखाया।
जी आर कवियुर
29 01 2026
(कनाडा , टोरंटो)

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