Monday, February 9, 2026

चांदनी में हृदय

 चांदनी में हृदय

निशब्द रात में चाँद के प्रेमपूर्ण साए की खोज,  
हवा की कोमल ठंडक धीरे से स्पर्श करती है।  
तारों की चमक में आँखें झिलमिलाती हैं,  
हृदय-आकाश में मौन खिलता है।

पुरानी यादें पत्तों पर गिरती हैं,  
प्रेम की लय में ध्वनि दिखाई नहीं देती।  
चाँद की जादुई रोशनी मार्ग पर छाया डालती है,  
मन में आकांक्षाएँ धीरे-धीरे उठती हैं।

कोहरे में छुपा एक दृश्य मुस्कुराता है,  
तारे आँख मारकर कोमल हँसी उठाते हैं।  
अनजाने में, प्रेम हृदय में इकट्ठा होता है,  
आंतरिक आत्मा को प्रकाश से भर देता है।

जी आर कवियुर 
09 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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