हृदय की सहमति
ठंडी शांति में एक सपना खिलता है,
हृदय बोले सत्य की ओर बढ़ता है।
स्मृतियों में गिरी मिठास चमकती है,
आत्मा की निश्चब्द मुस्कान धीरे से गले लगाती है।
जहाँ रंग मिलते हैं, राहें प्रकट होती हैं,
मौन की उंगली पर अनुभव झिलमिलाते हैं।
प्रेम की गर्मी में क्षण बहते हैं,
सपनों की लय में जीवन गाता है।
एकांत प्रेम धीरे-धीरे बढ़ता है,
हृदय में बिना आवाज़ के प्रवेश करता है।
मन सहमति देता है, हाथों में पकड़ बनाता है,
प्रकृति से मिलकर असीम शांति भर देता है।
जी आर कवियुर
09 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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