Wednesday, February 11, 2026

खुलें आँखें, जागे दिल ( सूफी ग़ज़ल)

 खुलें आँखें, जागे दिल ( सूफी ग़ज़ल)


हर पेड़, हर फूल, हर हवा में खुदा दिखे, खुलें आँखें, जागे दिल
रब खोल दे हमारी राहें, ताकि मन भी जागे, खुलें आँखें, जागे दिल

नदी की बहती धारा में छुपा जीवन का संदेश
फूलों की महक में बसा तेरा असीम प्यार, खुलें आँखें, जागे दिल

धरती की हर सांस में तेरी रहमत छुपी हुई
पंछियों की उड़ान में तेरा अहसास झलकता है, खुलें आँखें, जागे दिल

पेड़-पौधों से दुआ मांगें, पानी से आशीर्वाद लें
रब हमें सच दिखा, ताकि इंसान भी समझे, खुलें आँखें, जागे दिल

बादलों की छाया में छुपा अम्बर का रहस्य
धरती पे बरस जाए प्यार, खुलें आँखें, जागे दिल


यह जहाँ तुझसे सजा, हमने तुझसे प्यार किया
खुलें आँखें रब, इंसान के दिल में प्रकृति का घर किया, जी आर, खुलें आँखें, जागे दिल

जी आर कवियुर 
09 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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