बीते कल के घावों को गिनते हुए नहीं,
आज की दहलीज़ पार करनी है;
बीते समय की राख से ही
एक नया सपना गढ़ना है।
भविष्य कोई लिखी हुई तक़दीर नहीं,
हर कदम पर लिया गया फैसला है;
हाथ में कलम न हो फिर भी जीवन
हर पल अपनी एक पंक्ति लिखता है।
भटकी हुई राहें भी व्यर्थ नहीं थीं,
उन्होंने भी कोई दिशा दिखाई;
जिन पलों को हमने हार समझा था,
उन्होंने ही जीत की नींव बनाई।
इसलिए कल के आने का इंतज़ार मत करो,
उसकी पहली पंक्ति आज ही लिख दो;
जब समय पूछे—तुम कौन थे?
तुम्हारा जीवन ही तुम्हारी दस्तख़त हो।
जी आर कवियुर
05 10 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर)
No comments:
Post a Comment