बीते पन्नों को फाड़कर मत फेंको,
उनमें गुज़री राहों के निशान हैं;
मिटे हुए अक्षरों के बीच भी
जीवन ने कुछ अर्थ छिपाए हैं।
जो तुम्हारी कहानी को खत्म समझते हैं,
उन्हें क्या पता—कहानी अभी जारी है;
बंद दरवाज़ों के उस पार भी
अनखुले आकाश तुम्हें बुलाते हैं।
कल ने जहाँ सीमाएँ खींची थीं,
कल के बाद नई राह निकल सकती है;
जिस पल को अंत समझकर रुक जाओ,
वहीं से शुरुआत जन्म ले सकती है।
इसलिए अपनी कलम मत छोड़ना—
अंतिम पंक्ति अभी लिखी नहीं गई;
जीवन नाम की इस किताब का अगला पन्ना
तुम्हारे हाथ में है—इसे तुम ही लिखोगे।
जी आर कवियुर
05 10 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर)
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