टूटे दिलों की अंजुमन का हाल कौन जानता है,
चारों तरफ़ बिखरी तन्हाई का सवाल कौन जानता है।
आँखों में ठहरा हुआ दर्द दिखता तो है सभी को,
मन के भीतर छिपा कोई ख़याल कौन जानता है।
हँसते हुए चेहरों को सुखी मान लेते हैं सब ही,
किसके हृदय में कितना मलाल कौन जानता है।
कुछ लोग समय के साथ बदल जाते हैं चुपचाप,
रिश्तों में आएगा कब ज़वाल कौन जानता है।
जिसे अपना समझकर मन ने जीवन भर चाहा था,
वही बन जाएगा एक दिन सवाल कौन जानता है।
कितनी रातें जागकर गुज़रीं उसकी यादों में,
आँखों से पूछेगा कौन यह हाल कौन जानता है।
‘जी आर’ की ख़ामोशी का कोई हाल कौन जानता है,
दिल में छिपा बैठा उसका सवाल कौन जानता है।
जी आर कवियुर
07 10 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर)
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