Thursday, March 5, 2026

संभल कर बात कीजिए (ग़ज़ल)

 संभल कर बात कीजिए (ग़ज़ल)


मौसम यहाँ का सर्द है, ठहर कर बात कीजिए  
दिल भी बहुत नाज़ुक है, सोच कर बात कीजिए  

नज़रों में कुछ धुआँ सा है, देख कर बात कीजिए  
शायद कोई ख़्वाब टूटा हो, समझ कर बात कीजिए  

लफ़्ज़ों में आग भी छुपी है, परख कर बात कीजिए  
होठों की हल्की हँसी पर, ठहर कर बात कीजिए  

रिश्तों की डोर काँच सी है, पकड़ कर बात कीजिए  
टूटे तो फिर न जुड़ सकेगी, डर कर बात कीजिए  

माशूका तेरी याद भी है, गरम कर बात कीजिए  
मौसम की इस सर्दी में, सँवर कर बात कीजिए  

दुनिया बड़ी अजीब है ये, बदल कर बात कीजिए  
सच को ज़रा सा प्यार से, ढल कर बात कीजिए  

'जी आर' का दिल भी शीशा है, संभल कर बात कीजिए  
उसकी ख़ामोशी को पहले, समझ कर बात कीजिए

जी आर कवियुर 
26 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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