Thursday, March 5, 2026

बिजली का दीपक

 बिजली का दीपक

अंधकार की चादर के नीचे आकाश प्रतीक्षा करता है,  
बादलों का हृदय भारी और पूर्ण है।  
अचानक एक बिजली रेखा खींचती है,  
मौन की छाती पर रोशनी पड़ती है।  

केवल एक क्षण के लिए चमक,  
फिर भी मन में अनंत रूप से बस जाती है।  
यह चमक भय की छायाओं को प्रश्न करती है,  
अंधकार को धीरे से पीछे धकेलती है।  

बिजली का दीपक अपनी चमक में अल्पकालिक है,  
फिर भी सच्चाई को स्पष्ट दिखाता है।  
अंधकार और प्रकाश की सीमा के बीच,  
जीवन अपनी राह स्वयं खोज लेता है।

जी आर कवियुर 
03 03 2026
(कनाडा, टोरंटो)

No comments:

Post a Comment