यादें बनकर आऊँगा मैं (ग़ज़ल )
यादें बनकर आऊँगा मैं, दिल में बस जाऊँगा मैं,
ग़ज़ल बनकर तेरी धड़कन में ही रह जाऊँगा मैं।
आँसू बनकर नैनों में तेरे उतर जाऊँगा मैं,
ख़ामोशी में भी दिल की हर बात कह जाऊँगा मैं।
तन्हाई की रातों में तुझको यूँ छू जाऊँगा मैं,
हवा बनकर तेरे चेहरे को सहला जाऊँगा मैं।
टूटे ख़्वाबों के हर टुकड़े में दिख जाऊँगा मैं,
तेरे हर एक एहसास में खुद को बसा जाऊँगा मैं।
मिट भी जाऊँ अगर दुनिया से किसी दिन ऐ दोस्त,
तेरी यादों के सफ़र में फिर भी नज़र आऊँगा मैं।
राहों में बिछी यादों को फिर से सजा जाऊँगा मैं,
तेरे दिल के हर कोने में दीपक जला जाऊँगा मैं।
चाँदनी बनकर तेरी रातों में उतर जाऊँगा मैं,
तेरे हर ख़्वाब को अपना सा बना जाऊँगा मैं।
दर्द के हर एक लम्हे को हँसकर छुपा जाऊँगा मैं,
तेरी मुस्कान की ख़ातिर खुद को भुला जाऊँगा मैं।
'जी आर' नाम से दुनिया मुझे याद करेगी एक दिन,
तेरी महफ़िल में मैं शायर सा ही गुनगुना जाऊँगा मैं।
जी आर कवियुर
25 04 2026
( कवियुर,तिरुवल्ला )

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