Friday, April 24, 2026

ख़ामोशी बोल रही है (ग़ज़ल)

 

ख़ामोशी बोल रही है (ग़ज़ल)




तेरी ये ख़ामोशी बोल रही है,  
दिल की हर इक धड़कन बोल रही है।  

नज़रें झुकी हैं, लब कुछ कह न पाए,  
आँखों की हर हलचल बोल रही है।  

रातों की तन्हाई में तेरी यादें,  
ख़्वाबों की हर इक धड़कन बोल रही है।  

तू पास नहीं फिर भी लगता है यूँ,  
रूहों की हर सरगम बोल रही है।  

चुपके से बहते आँसू की रवानी,  
दिल की हर इक धड़कन बोल रही है।  

खोई हुई यादों की वीरान गलियाँ,  
बीते लम्हों की धड़कन बोल रही है।  

तन्हा सी राहों में तेरी आहटें अब,  
साँसों की हर इक धड़कन बोल रही है।  

छुपते नहीं “जी आर” के जज़्बात दिल में,  
हर इक शेर से उसकी सदा बोल रही है。

जी आर कवियुर 
24 04 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)







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