मौन से ढकी हुई वन में एक स्वर,
चाँद को मन में रोशन करता संगीत।
हल्की हवा में हृदय की धड़कन,
सितारों की छाया में लय बुनती।
गिरी हुई ओस की बूँदों में प्रतिबिंब,
रात की मधुर धुन में छुपा हुआ।
यादों के पंखों पर उड़ती मौन लय,
प्रकृति का संगीत हृदय को बुलाता।
रात्रि के जादू में विचार बहते,
प्रेम, दर्द, आशा का गान फैलते।
मौन में भी संगीत फैलता,
आसमान और हृदय दोनों को एक साथ बुलाता।
जी आर कवियुर
03 04 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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