Tuesday, April 21, 2026

॥ माँ गंगा के चरणों में ॥


॥ माँ गंगा के चरणों में ॥

शिव की जटा से निकली धारा, पावन रूप तुम्हारा है,
पतित-पावनी हे माँ गंगे, तू ही जग का सहारा है।
वैशाख शुक्ल की सप्तमी को, धरा पर जो तुम आई हो,
अमृतमयी शीतल जल से, खुशियाँ साथ तुम लाई हो।

जह्नु ऋषि की तुम पुत्री हो, 'जाह्नवी' नाम तुम्हारा है,
पाप मिटाती हर प्राणी का, निर्मल प्रवाह तुम्हारा है।
पुण्य उदय होते हैं माँ, तेरे पावन एक दर्शन से,
जीवन सफल हो जाता है, श्रद्धापूर्ण आचमन से।

दीप दान की अनुपम शोभा, तट पर छटा निराली है,
आरती की पावन ध्वनि से, मन में छाई लाली है।
जन-जन की तुम तारिणी माता, नमन तुम्हें शत-बार करें,
भक्ति तुम्हारी हृदय में भरके, हम भवसागर पार करें।

जी आर कवियुर 
22 04 2026
तिरुवल्ला कवियुर

Sunday, April 19, 2026

नैनों की प्यास(एक ग़ज़ल)

नैनों की प्यास
(एक ग़ज़ल)

ये नैना काजल बिना तरसें,
तेरी दीद की आस में तरसें।

तेरे ख़्वाब दिल के क़रीब आएँ,
मगर छूने की प्यास में तरसें।

तेरी याद की चाँदनी उतरे,
हम अंधेरी हर रात में तरसें।

लबों पे तेरा ही नाम आए,
मगर कहने की बात में तरसें।

तू पास होकर भी दूर जैसे,
हम तेरे ही एहसास में तरसें।

ये दिल तेरे इश्क़ में डूबा,
किसी और जज़्बात में तरसें।

नज़रें बिछाए बैठे हैं हम,
तेरे आने की राह में तरसें।

'जी आर' भी अब यही कहे है,
तेरी एक मुलाक़ात में तरसें।

 जी आर कवियुर 
20 04 2026 

झील किनारे की निस्तब्धता

झील किनारे की निस्तब्धता


झील किनारे शांति फैलती,  
जल दर्पण सा स्थिर दिखता।  
जब हवा हल्के से छू जाती,  
लहरें धीरे-धीरे चलतीं।  

दूर कहीं नाव की परछाईं,  
खामोशी में कथा लिखती।  
पत्तों की शांत सी हलचल में,  
प्रकृति सुकून देती है।  

आकाश जल में झलक दिखाए,  
दो दुनिया एक हो जातीं।  
इन शांत पलों के भीतर,  
दिल को सुकून मिल जाता।

जी आर कवियुर 
19 04 2026
(तिरुवल्ला ,कवियुर )

संध्या के बादल

संध्या के बादल

संध्या में बादल रंग बदलते,  
आकाश चित्र सा बन जाता।  
लाल और सुनहरे रंग मिलकर,  
एक सुंदर दृश्य रच जाते।  

धीरे-धीरे चलती आकृतियां,  
सपनों जैसी लगती हैं।  
सूर्य के विदा होते क्षण में,  
रोशनी छाया में खो जाती।  

इन बादलों की यात्रा में,  
समय शांत बहता जाता।  
इस संध्या की सुंदरता में,  
हृदय को शांति मिल जाती।

जी आर कवियुर 
19 04 2026
(तिरुवल्ला ,कवियुर )

बारिशी हवा की लय

बारिशी हवा की लय

बरसाती हवा की लय में,  
पत्ते धीरे-धीरे हिलते।  
जब बूंदें साथ मिलतीं,  
एक मधुर धुन बनती।  

ठंडी छुअन गुजरती जाए,  
मन शांति में बहता है।  
भीगी राहें चमक उठतीं,  
रोशनी चारों ओर नाचे।  

जब दोनों का संगम होता,  
प्रकृति गीत बन जाती।  
इस मधुर लय के भीतर,  
जीवन खिल उठता है।

जी आर कवियुर 
19 04 2026
(तिरुवल्ला ,कवियुर )

तारों की गलियां


तारों की गलियां

आकाश की राहों में तारे चमकते,  
रात अपनी सुंदरता दिखाती।  
छोटी-छोटी रोशनियां मिलकर,  
अनंत कथा सुनाती जातीं।  

इस खामोश आकाश में,  
मन दूर तक चला जाता।  
हर चमक एक सपना बनकर,  
जीवन को भर देता।  

गलियों जैसे फैले तारे,  
एक अद्भुत संसार रचते।  
जब आंखें उन्हें निहारतीं,  
दिल में खुशी भर जाती।

जी आर कवियुर 
19 04 2026
(तिरुवल्ला ,कवियुर )

पक्षियों का गीत

पक्षियों का गीत

जब सुबह पक्षी गाते,  
दुनिया नई जाग उठती।  
पंख फैलाकर उड़ते क्षण में,  
स्वतंत्रता गीत बन जाती।  

पेड़ों की शाखों से,  
मधुर स्वर बहते आते।  
हवा के संग मिलकर,  
दिल को छू जाते हैं।  

इन छोटे जीवों का गान,  
बड़ी खुशी दे जाता।  
प्रकृति के इस संगीत में,  
जीवन उजाला पाता।

जी आर कवियुर 
19 04 2026
(तिरुवल्ला ,कवियुर )