Sunday, April 19, 2026

नैनों की प्यास(एक ग़ज़ल)

नैनों की प्यास
(एक ग़ज़ल)

ये नैना काजल बिना तरसें,
तेरी दीद की आस में तरसें।

तेरे ख़्वाब दिल के क़रीब आएँ,
मगर छूने की प्यास में तरसें।

तेरी याद की चाँदनी उतरे,
हम अंधेरी हर रात में तरसें।

लबों पे तेरा ही नाम आए,
मगर कहने की बात में तरसें।

तू पास होकर भी दूर जैसे,
हम तेरे ही एहसास में तरसें।

ये दिल तेरे इश्क़ में डूबा,
किसी और जज़्बात में तरसें।

नज़रें बिछाए बैठे हैं हम,
तेरे आने की राह में तरसें।

'जी आर' भी अब यही कहे है,
तेरी एक मुलाक़ात में तरसें।

 जी आर कवियुर 
20 04 2026 

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