Friday, April 3, 2026

क़ुदरत से इबारतें ( ग़ज़ल )

 क़ुदरत से इबारतें ( ग़ज़ल )


सुबह की धूप ने ओस से की बातें
पेड़ों ने हवा से दी नई सौग़ातें

नदी ख़ामोश चली आई आईने की तरह
चाँद ने रात से की मुलाक़ातें

बारिशों ने भीगकर मिट्टी से सीखा सब्र
ख़ुशबुओं ने धरा से की मुलाक़ातें

पत्तियों ने हवा में लिखा इश्क़ का ख़त
डालियों ने वातावरण से की इबारतें

धूप-छाँव ने सिखाया हमें जीने का हुनर
वक़्त ने मौसमों से सीखी रिवायतें

जी आर पूछे अगर रब कहाँ मिलता है
क़ुदरत ने कहा — दिल से की इबादतें

जी आर कवियुर 
03 02 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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