बरसाती हवा की लय में,
पत्ते धीरे-धीरे हिलते।
जब बूंदें साथ मिलतीं,
एक मधुर धुन बनती।
ठंडी छुअन गुजरती जाए,
मन शांति में बहता है।
भीगी राहें चमक उठतीं,
रोशनी चारों ओर नाचे।
जब दोनों का संगम होता,
प्रकृति गीत बन जाती।
इस मधुर लय के भीतर,
जीवन खिल उठता है।
जी आर कवियुर
19 04 2026
(तिरुवल्ला ,कवियुर )
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