मौन के बीच गूंजता एक तान,
जीवन की पहचान बनता हर क्षण।
अनजाने ही हर पल में,
अंदर की दुनिया दिखलाता मन।
खुशी के पंखों पर उड़ता स्वर,
दर्द की छाया में धीमा पड़ता।
हर धड़कन में भावनाएँ भरतीं,
अनंत बहतीं, रुकती न रहतीं।
प्रेम के स्पर्श से तेज़ हो जाए,
यादों में बसकर जीवित रह जाए।
यह नाद जो कभी न थमता,
जीवन का सत्य सदा कहता।
जी आर कवियुर
03 04 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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