Friday, April 3, 2026

सफ़र (ग़ज़ल)

 सफ़र (ग़ज़ल)




ये ज़िन्दगी भी क्या है, बस एक लम्बा सफ़र,
कहीं रुकता नहीं है, ये यादों का सफ़र।

कभी धूप मिली तेज़, कभी ठंडी छाँव मिली,
हर मोड़ पर नया है, ये अपनों का सफ़र।

सफेद बालों ने लिख दी है कहानी अपनी,
चेहरे पर दिखता है, उम्र भर का सफ़र।

पुरानी यादों की गठरी है साथ मेरे,
आँखों में बसता है, ख़्वाबों का सफ़र।

थक कर भी जो कभी रुकता नहीं है,
वही जानता है, इस रूह का सफ़र।

बाल सफेद हो गए, चेहरे पर रेखाएँ आईं,
बताती हैं ये सब, तजुर्बों का सफ़र।

‘जी आर’ लिखता रहा, दिल की हर बात को,
शायरी में ही छुपा है, मेरी रूह का सफ़र।

जी आर कवियूर
01 04 2026
 (कनाडा , टोरंटो)


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