Friday, April 3, 2026

आशा की किरण

आशा की किरण

जहाँ अंधकार ने सब घेरा,
एक किरण ने आँखें रोशन किया।
आशा के मृदु स्पर्श में,
हृदय का भय धीरे-धीरे पिघल गया।

उभरते सूरज की किरणें फैलती हैं,
धरती और बारिश मिलकर प्रतिबिंब बनाती हैं।
स्मृतियाँ फिर से जीवित होती हैं,
समय की चादर में छुपा प्यार लौटता है।

जो खो गया, उससे पाठ सीखा गया,
आँखों में बड़े सपने चमकते हैं।
एक निश्चय जो कभी नहीं मिटता,
जीवन की अनंत यात्रा बुलाती है।


जी आर कवियुर 
03 04 2026
(कनाडा, टोरंटो)


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