Friday, April 3, 2026

ज्ञान की ज्योति (​भक्ति गज़ल)

 ज्ञान की ज्योति 

(​भक्ति गज़ल)




​हे माँ सरस्वती, वीणा वादिनी, ज्ञान की ज्योति जगा दो,

मेरे शब्दों में सत्य और प्रेम का मधुर स्वर सजा दो।


​अंधेरों से घिरा है मन का कोना, भटक रहा हूँ राहों में,

मिटा के अज्ञान का ये कुहासा, सुगम रास्ता दिखा दो।


​जगत की चकाचौंध में न खो जाए कहीं सादगी मेरी,

मेरे अंतर्मन में तू अपनी भक्ति की मूरत बसा दो।


​कोई राग ऐसा छेड़ो जो रूह को सुकून दे जाए माँ,

सुरों के संगम से आज मेरा वीरान गुलशन खिला दो।


​नहीं मांगता मैं स्वर्ण-मुकुट या वैभव की ये दुनिया,

बस अपनी करुणा का एक कतरा मेरे दामन में गिरा दो।


​कलम चले तो सिर्फ हक की बातें लिखे ज़माने के लिए,

मेरी स्याही में तुम अपनी पावनता का अमृत मिला दो।


​भटक न जाए राह से कभी 'जी आर' इस स्वार्थ के जग में,

तू अपनी ममता की छाँव में उसे हरदम पनाह दे दो।


जी आर कवियुर 

01 04 2026

(कनाडा, टोरंटो)




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