इस धरती के सपने सुंदर निराले,
हर पल कीमती, खुशियों वाले।
आसमान सा फैला यह जीवन हमारा,
पंख फैलाकर भरते ऊँची उड़ान।
बदलता संसार एक माया का खेल,
सामने दिखते केवल परछाईयों के मेल।
अनजानी राहों पर बढ़ते ही जाना,
हवा संग बहते बादलों का ठिकाना।
अंत में आती वो शांत सच्चाई,
मृत्यु ने सबकी इच्छाएं भुलाई।
सुनहरी रोशनी में विलीन होती रूह,
छोड़ जाती यहाँ यादों की खुशबू।
जी आर कवियुर
26 03 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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