जब चांदनी धीरे उतरती,
दुनिया चांदी सी चमकती।
राहों पर उजाला फैलता,
परछाइयां लंबी चलतीं।
रात की खामोशी में,
मन सपनों में खो जाता।
आकाश में चमकता चांद,
आशा का दीप बन जाता।
इन चांदनी के दृश्यों में,
शांति भरी दुनिया दिखती।
मन की गहराइयों में भी,
रोशनी जगमग करती।
जी आर कवियुर
13 04 2026
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