Sunday, April 19, 2026

झील किनारे की निस्तब्धता

झील किनारे की निस्तब्धता


झील किनारे शांति फैलती,  
जल दर्पण सा स्थिर दिखता।  
जब हवा हल्के से छू जाती,  
लहरें धीरे-धीरे चलतीं।  

दूर कहीं नाव की परछाईं,  
खामोशी में कथा लिखती।  
पत्तों की शांत सी हलचल में,  
प्रकृति सुकून देती है।  

आकाश जल में झलक दिखाए,  
दो दुनिया एक हो जातीं।  
इन शांत पलों के भीतर,  
दिल को सुकून मिल जाता।

जी आर कवियुर 
19 04 2026
(तिरुवल्ला ,कवियुर )

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