स्वर्ग और नरक यहीं है
(ग़ज़ल)
सजन रे समझो कि स्वर्ग और नरक यहीं है,
सजन रे समझो कि स्वर्ग और नरक यहीं है।
स्नेह से व्यवहार करो, स्वर्ग सजा लो यहीं है,
कटु वचन बोलो अगर, नरक बना लो यहीं है।
महल चौबारे, धन-दौलत सब यहीं रह जाएंगे,
खुदा ने जो जीवन दिया, उसका हिसाब यहीं है।
भला करोगे तो भला ही लौट कर आएगा,
बुरा करोगे तो बुराई का जवाब यहीं है।
किस्से ये पुराने हैं, दुनिया कहती आई,
लड़केपन से बुढ़ापे तक हर ख्वाब यहीं है।
सच की राह पे चलो, वही रौशनी दिखाएगी,
झूठ के अंधेरों में हर इक नक़ाब यहीं है।
हर एक रूह में वही एक नूर समाया है,
अलग दिखते हैं मगर सबका जनाब यहीं है।
यक़ीं रखो तो दिल से दिल का रास्ता बनता है,
एक-एक में खुदा है, सबका हिसाब यहीं है।
प्रेम सच्चा हो तो वक्त भी झुक जाता है,
ये प्रेम नश्वर नहीं, इसका उजास यहीं है।
“जी आर” ये महसूस कर कहता है दिल से आज,
इंसान के कर्मों में ही स्वर्ग और नरक यहीं है।
जी आर कवियुर
31 03 2026
(कनाडा , टोरंटो)

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