Friday, April 3, 2026

करार है (ग़ज़ल)

करार है (ग़ज़ल)


दिल को भी ज़ुबाँ मिली — बीती यादों का करार है,
लम्हों में सदियों का सफ़र, आज भी करार है।

तेरी ख़ामोश नज़र में छुपा कैसा इकरार है,
बिन कहे जो दिल समझे, वही सच्चा करार है।

रात भर जागती आँखों को तेरा इंतज़ार है,
चाँदनी भी थम गई — जैसे उसको करार है।

तेरी बातों में अजीब सा कोई ऐतबार है,
झूठ भी सच लगे दिल को — ये कैसा करार है।

तेरी यादों का नशा दिल पे ऐसा ख़ुमार है,
होश में रह के भी जैसे कोई बेकरार है।

ज़िंदगी के हर मोड़ पे तेरा ही शिकार है,
दिल ये मासूम सा फिर भी उसी पे करार है।

दर्द को मुस्कुरा के हमने यूँ ही गुज़ार है,
हर खुशी के पीछे जैसे छुपा सा करार है।

'जी आर' हमने दर्द को लफ़्ज़ों में ढाल कर कह दिया,
जो भी सुन ले एक दफ़ा — उम्र भर करार है।


 जी आर कवियुर 
26 03 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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