आंखों में नमी, दिल में प्यार है
आहों की ये दास्तान भी प्यार है
तन्हाइयों का सिलसिला बरक़रार है
हर एक ख़्वाब अब भी तेरा इंतज़ार है
दिल की सदा में छुपा इकरार है
खामोश लफ़्ज़ों में भी असरदार है
रातों की चादर में तेरा ही ख़ुमार है
चांदनी भी जैसे तेरा किरदार है
यादों का हर लम्हा दिल पे सवार है
बीता हुआ हर पल भी क़रार है
रूह में बसा तेरा ही निखार है
मेरे हर जज़्बात पे तेरा अधिकार है
‘जी आर’ के लफ़्ज़ों में बस तेरा ही प्यार है
इस दिल की हर धड़कन तेरा ही इकरार है
जी आर कवियुर
16 04 2026
(तिरुवल्ला,कवियुर)
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