जब सुबह पक्षी गाते,
दुनिया नई जाग उठती।
पंख फैलाकर उड़ते क्षण में,
स्वतंत्रता गीत बन जाती।
पेड़ों की शाखों से,
मधुर स्वर बहते आते।
हवा के संग मिलकर,
दिल को छू जाते हैं।
इन छोटे जीवों का गान,
बड़ी खुशी दे जाता।
प्रकृति के इस संगीत में,
जीवन उजाला पाता।
जी आर कवियुर
19 04 2026
(तिरुवल्ला ,कवियुर )
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