जब बूंदें मोती बनकर गिरतीं,
धरती खुशी से मुस्काती।
पत्तों पर ठहरकर चमकतीं,
आंखों को ठंडक देतीं।
हर छोटी सी गिरती बूंद,
जीवन में नई ताजगी लाए।
भीगी राहें चमक उठतीं,
रोशनी पानी में खेले।
इन बारिश के मोतियों में,
खुशी छुपी रहती है।
प्रकृति के इस खेल में,
मन आनंद पा लेता है।
जी आर कवियुर
13 04 2026
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