संध्या में बादल रंग बदलते,
आकाश चित्र सा बन जाता।
लाल और सुनहरे रंग मिलकर,
एक सुंदर दृश्य रच जाते।
धीरे-धीरे चलती आकृतियां,
सपनों जैसी लगती हैं।
सूर्य के विदा होते क्षण में,
रोशनी छाया में खो जाती।
इन बादलों की यात्रा में,
समय शांत बहता जाता।
इस संध्या की सुंदरता में,
हृदय को शांति मिल जाती।
जी आर कवियुर
19 04 2026
(तिरुवल्ला ,कवियुर )
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