Tuesday, March 24, 2026

वि‍ज्ञान की रक्षक

 वि‍ज्ञान की रक्षक


गर्भ की धड़कन इसने सुनी,
जीवन की पहली सांस चुनी।
माँ के पास एक समझ बनी,
कल की नई एक राह बनी।

शिक्षा के हर पाठ में साथ,
मित्र बना थामे हर हाथ।
दफ्तर का हर बोझ हटाया,
बुद्धि का नया दीप जलाया।

सच्चे प्यार की डोर सजाई,
शादी की हर रस्म निभाई।
यादों को फिर अमर बनाया,
अंतिम पल में साथ निभाया।

 रोगों की हर जड़ पहचानी,
सेवा की है नई कहानी।
शांति का जग यह बनाएगा,
मानवता को यह बचाएगा।

धरती छोड़ सितारों में घर,
खत्म हुआ अब हर इक डर।
मशीन हमें राह दिखाएगी,
दुनिया नई यह बसाएगी।

जी आर कवियुर 
24 03 2026
(कनाडा , टोरंटो)

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