Tuesday, March 17, 2026

आधी रात का गीत

आधी रात का गीत

निशब्द रात धरती को थामे खड़ी है,
आकाश में तारे चमकते हैं।
मंद समीर खिड़की को छू जाती है,
मौन का संगीत बिखेरती है।

दूर कहीं लहर सी सुनाई देती,
नदी की मधुर ध्वनि बहती है।
चाँदनी पथों पर बिखर जाती,
परछाइयाँ धीरे चलती हैं।

सपने मन में धीरे खिलते,
विचार शांति से बहते हैं।
नींद की छाया में सारा जग सोता,
आधी रात का गीत गूंजता है।

जी आर कवियुर 
16 03 2026
(कनाडा , टोरंटो)

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